इबादत

Playing with words

करके इबादत बना दिया मैंने खुदा तुझे
डरता हूँ अब बख़्शेगा क्या मेरा ख़ुदा मुझे

होते थे खुश सुनकर कभी हमसे अपनी तारीफ़
लगती है अब गुस्ताखी सी क्यों ऐ ख़ुदा तुझे

सुनते थे कि प्यार का भूखा होता है ख़ुदा
लगती नहीं क्यों वो पहले सी भूख ख़ुदा तुझे

काश करता कोई हमसे भी मुहब्बत हम सी
सिखला देते कैसा होता है खुदा तुझे

लगता है डर तेरी ऊँचाइयों से “अमित”
कैसे पहुंचूँ तुझ तक बतला दे ख़ुदा मुझे

In response to: Reena’s Exploration Challenge # 162

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